
परम पूज्य श्री श्री १००८ आचार्य स्वामी श्री जितेंद्रनाथ महाराज श्रीनाथ पीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर हैं तथा नाथ संप्रदाय की महान परंपरा के अठारहवें योगपट्टाधीश के रूप में प्रतिष्ठित हैं। श्रीनाथ पीठ की अखंड परंपरा विगत लगभग छह शताब्दियों से आदिनारायण, भगवान दत्तात्रेय, श्रीजनार्दन स्वामी, एवं संतश्रेष्ठ एकनाथ महाराज के दिव्य उत्तराधिकार से प्रवाहित होती आ रही है। गुरुपरंपरा से प्राप्त आध्यात्मिक तेज, वैदिक ज्ञान और तपश्चर्या के आलोक में, परम पूज्य महाराजश्री ने भारतीय संस्कृति, धर्म-संवर्धन एवं समाजकल्याण हेतु अमूल्य योगदान प्रदान किया है। परम पूज्य श्री जितेंद्रनाथ महाराज को बाल्यकाल में ही श्री श्री १००८ ब्रह्मानंद महर्षि स्वामी श्री मनोहरनाथ महाराज से दीक्षा प्राप्त हुई। उन्होंने ऋग्वेद एवं अन्य वैदिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया है तथा वेदान्त और परंपरा से प्राप्त दिव्य ज्ञान में पारंगत हैं।
श्री गुरुजी विज्ञान, समाजशास्त्र, औषधनिर्माण शास्त्र जैसे विविध विषयों में विद्वत्ता से विभूषित हैं एवं उन्होंने सूचना विज्ञान (Information Science) विषय में विश्वविद्यालय स्वर्णपदक प्राप्त कर विद्याविशारद की उपाधि अर्जित की है। वर्ष 2001 में श्रीनाथ पीठ पर योगपट्टाभिषेक सम्पन्न हुआ, जिसमें “स्वामी जितेंद्रनाथ गुरु मनोहरनाथ” इस योगपट्टनाम से उन्होंने पीठ का आध्यात्मिक उत्तरदायित्व ग्रहण किया।
परम पूज्य श्री जितेंद्रनाथ महाराज का कार्यक्षेत्र अत्यंत व्यापक है। कथा, कीर्तन, प्रवचन, ज्ञानोपदेश, वैदिक शिक्षा, तपश्चर्या, भारतभ्रमण, जनसेवा, धर्म-संवर्धन आदि अनेक आयामों में उन्होंने अतुलनीय सेवाएं दी हैं। आज उनके कृपा-पाथेय से संपूर्ण भारतवर्ष में लाखों भक्तों एवं साधकगणों का विशाल आध्यात्मिक परिवार निर्मित हुआ है।
परम पूज्य श्री श्री १००८ आचार्य स्वामी श्री जितेंद्रनाथ महाराज श्रीनाथ पीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर हैं तथा नाथ संप्रदाय की महान परंपरा के अठारहवें योगपट्टाधीश के रूप में प्रतिष्ठित हैं। श्रीनाथ पीठ की अखंड परंपरा विगत लगभग छह शताब्दियों से आदिनारायण, भगवान दत्तात्रेय, श्रीजनार्दन स्वामी, एवं संतश्रेष्ठ एकनाथ महाराज के दिव्य उत्तराधिकार से प्रवाहित होती आ रही है। गुरुपरंपरा से प्राप्त आध्यात्मिक तेज, वैदिक ज्ञान और तपश्चर्या के आलोक में, परम पूज्य महाराजश्री ने भारतीय संस्कृति, धर्म-संवर्धन एवं समाजकल्याण हेतु अमूल्य योगदान प्रदान किया है। परम पूज्य श्री जितेंद्रनाथ महाराज को बाल्यकाल में ही श्री श्री १००८ ब्रह्मानंद महर्षि स्वामी श्री मनोहरनाथ महाराज से दीक्षा प्राप्त हुई। उन्होंने ऋग्वेद एवं अन्य वैदिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया है तथा वेदान्त और परंपरा से प्राप्त दिव्य ज्ञान में पारंगत हैं।
श्री गुरुजी विज्ञान, समाजशास्त्र, औषधनिर्माण शास्त्र जैसे विविध विषयों में विद्वत्ता से विभूषित हैं एवं उन्होंने सूचना विज्ञान (Information Science) विषय में विश्वविद्यालय स्वर्णपदक प्राप्त कर विद्याविशारद की उपाधि अर्जित की है। वर्ष 2001 में श्रीनाथ पीठ पर योगपट्टाभिषेक सम्पन्न हुआ, जिसमें “स्वामी जितेंद्रनाथ गुरु मनोहरनाथ” इस योगपट्टनाम से उन्होंने पीठ का आध्यात्मिक उत्तरदायित्व ग्रहण किया।
परम पूज्य श्री जितेंद्रनाथ महाराज का कार्यक्षेत्र अत्यंत व्यापक है। कथा, कीर्तन, प्रवचन, ज्ञानोपदेश, वैदिक शिक्षा, तपश्चर्या, भारतभ्रमण, जनसेवा, धर्म-संवर्धन आदि अनेक आयामों में उन्होंने अतुलनीय सेवाएं दी हैं। आज उनके कृपा-पाथेय से संपूर्ण भारतवर्ष में लाखों भक्तों एवं साधकगणों का विशाल आध्यात्मिक परिवार निर्मित हुआ है।
श्रीदेवनाथ पीठ की परंपरा समस्त भारतवर्ष ही नहीं, अपितु विदेशों में भी प्रतिष्ठा प्राप्त एक प्राचीन, बहुश्रुत एवं श्रद्धास्पद परंपरा है। धर्म एवं राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित यह दिव्य परंपरा, सुरजी स्थित श्रीदेवनाथ मठ को अपनी राजधानी के रूप में वंदन करती है। यही इस अखंड परंपरा का मूलाधार है। भारतवर्ष एवं विश्व में फैले इस परंपरा से संलग्न अनेक तीर्थस्थल, साधना-स्थली एवं संस्थान श्रीनाथ पीठ की आध्यात्मिक ऊर्जा, कृपा एवं अनुग्रह के केंद्र हैं। इन सभी स्थलों पर देव, देश और धर्म के कल्याणार्थ अनेक धार्मिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक उपक्रम, श्रीनाथ पीठ के विद्यमान पीठाधीश्वर की प्रेरणा एवं आशीर्वाद से अनवरत चलायमान हैं।