"ज्ञान " वैश्विक चेतना और शक्ति का मूल स्रोत है। वैदिक परंपरा ने पहली बार इसे दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। इसीलिए वैदिक संस्कृति विश्व में अभूतपूर्व महत्व रखती है।
वैदिक संस्था जगद्गुरु श्रीदेवनाथ वेद विद्यालय भारत के पारंपरिक वैदिक ज्ञान को जनमानस को उपलब्ध कराने के लिए विशेष प्रयास कर रही है।
हमारी प्राचीन वैदिक परंपरा, विभिन्न प्राचीन कलाएं और विज्ञान, धार्मिक ग्रंथ, उपनिषदों, भारतीय दर्शन, कर्मकाण्ड, अनुष्ठान आदि का संरक्षण एवं संवर्धन करना इस उद्देश्य से वेदविद्यालय द्वारा ऋग्वेद की शाकल शाखा को दृश्य-श्रव्य रूप में संकलित किया गया है, जिसे आईजीएनसीए, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वैदिक हेरिटेज पोर्टल पर प्रकाशित किया गया है।
पारंपरिक धर्मग्रंथ-आधारित कानूनी वक्तव्यों के महत्व की पर्याप्त जानकारी प्रसारित करने के लिए यहां सूचनात्मक लेख प्रकाशित किए जाते हैं।
विभिन्न वैदिक स्तोत्र, भजन, साथ ही विभिन्न वैदिक ग्रंथ जैसे शिक्षा, ज्योतिष, छंदशास्त्र, निघंटु, अष्टाध्यायी, आश्वलायन गृह्यसूत्र, और विभिन्न पारंपरिक ग्रंथ जैसे श्रीमद्भगवत गीता, श्री दुर्गा सप्तशती, ज्ञानेश्वरी, यूट्यूब के माध्यम से मौखिक रूप से एकत्र किए जाते हैं।
इसके अतिरिक्त " जगद्गुरु श्रीदेवनाथ वेद विद्यालय " अध्ययन, अध्यापन, यज्ञसत्र, वैदिक चर्चा एवं संगोष्ठियों का आयोजन करने, वेदों का निष्पक्ष प्रचार-प्रसार करने वाले एक नहीं अपितु अनेक समूहों का निर्माण करने तथा राष्ट्र कल्याण हेतु चरित्र निर्माण के कार्य में योगदान देने में अग्रणी है।