पारंपरिक ज्ञान, ग्रंथ सम्पदा और चिंतनशील साहित्य की विरासत के निरंतर संरक्षण की प्रेरणा देने वाले पीठ के कार्यों से प्रेरित होकर, इस पुस्तकालय का नाम 'पूजनीय श्रीदेवनाथ' महाराज के नाम पर रखा गया है।
इस पुस्तकालय में धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषयों पर विश्व की श्रेषठतम पुस्तकें, पत्र-पत्रिकाएं, विश्वकोष, एवं दुर्लभ पांडुलिपियां शामिल हैं। इसमें लगभग ५००० पुस्तकों को संग्रहित किया गया है। नाथ परंपरा के पूज्य पीठाधीशों की ग्रंथरचना,काव्य-साहित्य, उनके इतिहास, चरित्र, जीवनियां, के साथ विभिन्न शब्दकोश, धार्मिक ग्रंथ आदि को संग्रहित किया गया है।
भविष्य में इस अमूल्य साहित्य का लोकार्पण करने के लिए विभिन्न भाषाओं में साहित्य तैयार करने, प्रकाशित करने तथा इसके प्रसार करने की योजना पर कार्य प्रगति पर है।