तृतीय पीठाधीश
परम पूज्य स्वामी श्री नित्यनंदनाथ महाराज
(१५८२ - १६६१)
श्री नित्यानंदनाथ महाराज मूलतः काशी के रहने वाले थे और पैठण के निकट कावसान में बस गये।
महाराज बचपन से ही श्री एकनाथ महाराज जी के सानिध्य में रहे। उन्हें गावबा नाम से भी संबोधित किया जाता था। लेकिन आचार्य पट्टाभिषेक दीक्षा के बाद उन्हें नित्यानंद नाथ नाम दिया गया।
महाराज जी ने श्री एकनाथी भावार्थ रामायण पूर्ण की। इसके अलावा वे कीर्तन, उपदेश, भिक्षाटन और सामाजिक प्रबोधन में व्यस्त रहें।
श्री नाथ परंपरा की परमार्थिक, विवेकपूर्ण वैराग्य और उज्ज्वल भक्ति उनके शासनकाल में प्रकाशमान हुई।
उन्होंने सद्गुरु पर दृढ़ विश्वास रखने और उनकी आज्ञा का पालन करने की शिक्षा दी।
उन्होंने १६६१ ई. कावसान में समाधि ली लेकिन वर्तमान में उनकी समाधि पैठण में ही है।