चतुर्थ पीठाधीश
परम पूज्य स्वामी श्री कृष्णानंदनाथ महाराज
(१६२९ - १६८२)
महाराज जी का जन्म शक सं. १५५० में महाराष्ट्र के खानदेश के 'सावदे' गांव में हुआ।
महाराज जी के माता-पिता ने भक्ति भाव से भगवान दत्तात्रेय की उपासना की, उस समय भगवान दत्तात्रेय ने उन्हें आम्रफल का प्रसाद दिया और वचन दिया कि तुम्हारे गर्भ से श्री नारायण का अवतार होगा। वैकुंठरमण भगवान जन्म लेंगे। इस धरा का धर्मोद्धार करेंगे।
सन् १६५४ ई.में भगवान दत्तात्रेय की आज्ञा से नारद जी कीर्तनकार के वेश में उनके सामने प्रकट हुए और उन्होंने श्री कृष्णानंद जी को उनके अगले कार्य का दिशानिर्देश स्मरण कराया।
उन्होंने गुरुभक्ति के माध्यम से परोपकार की खदान दिखाकर समाज को सन्मार्ग पर लगाने का महत्वपूर्ण कार्य दिया।
१६८२ ई. ५३ वर्ष की आयु में उन्होंने समाधि ली और अपना अवतार-कार्य पूर्ण किया।