द्वादश: पीठाधीश
परम पूज्य स्वामी श्री जयकृष्णनाथ महाराज
(१७९० - १८५१)
आपका प्राकट्य वर्धा जिला, आर्वी के पास आष्टी के देशपांडे परिवार में हुआ ।
बचपन में सद्गुरु देवनाथ महाराज द्वारा आपकी परिक्षा ली गई । परीक्षा में आपने अपने गुरु श्री दयालनाथ महाराज के लिए अपने प्राणों की आहुति देने की तत्परता दिखाई और सद्गुरुनिष्ठा का परिचय दिया।
आपका पट्टाभिषेक नागपुर के पास पवनी में वैनगंगा के तट पर श्री गाडे महाराज द्वारा संपन्न कराया गया ।
अपने सद्गुरु की तरह आपकी मधुर वाणी में कीर्तन ने सभी को ईश्वरत्व भक्ति में लीन कर दिया। आप भगवान परशुराम के अंशावतार थे।
आपने अन्न-जल त्यागकर भगवान दत्तात्रेय की कठोर तपस्या की।
भगवान दत्तात्रेय ने आपको दर्शन देकर आशीर्वाद दिया तथा पारंपरिक भव्य कंठी, धर्मदण्ड और एकमुखी रुद्राक्ष को स्पर्श कर पुनः पुनर्जिवित (नया) कर दिया
एक अवसर पर उन्होंने निजाम और दीवान द्वारा दी गई जहागीर को अस्वीकार करके नाथ पारंपारिक महान भिक्षाटन की महिमा को कामधेनु सिद्ध किया था ।