आपका आविर्भाव सन १८९४ ई. भाद्रपद माह की प्रतिपदा को उमरेड निवासी भाके परिवार में हुआ था। आपके पिता श्री मारोतिनाथ महाराज के बाल मित्र और श्री भालचंद्रनाथ महाराज के अनुग्रहित थे।
आपका आविर्भाव सन १८९४ ई. भाद्रपद माह की प्रतिपदा को उमरेड निवासी भाके परिवार में हुआ था। आपके पिता श्री मारोतिनाथ महाराज के बाल मित्र और श्री भालचंद्रनाथ महाराज के अनुग्रहित थे। "भाक्यांचा पुत्र नामे गोविंद । तयासी भालचंद्र अंकी बसवित। म्हणती अजेगुरु श्री जयकृष्णनाथ । पुनश्च अवतरत पीठकार्या ।" (दे.ली.३२. २)
इसके अनुसार, श्री गोविंदनाथ के रूप में श्री जयकृष्णनाथ पृथ्वी पर पुनः अवतरित हुए।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के असहयोग आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन आदि राष्ट्रीय आंदोलनो में आप सक्रिय रूप से शामिल थे । उन्हें 'गुरुजी' की उपाधि दी गई थी।
राष्ट्रीय, सामाजिक, धार्मिक आदि विभिन्न क्षेत्रों में आपका विशेष प्रभाव था।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के असहयोग आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन आदि राष्ट्रीय आंदोलनो में आप सक्रिय रूप से शामिल थे । उन्हें 'गुरुजी' की उपाधि दी गई थी।
आपने श्री देवनाथ मठ में भगवान श्री माधव मंजरी के विग्रह को स्थापित किया।