द्वितीय पीठाधीश
परम पूज्य स्वामी श्री एकनाथ महाराज
(१५४९ - १६००)
श्री एकनाथ महाराज जी का आविर्भाव शक सं.१४५५ ( १५३३ई.) पैठण, महाराष्ट्र में हुआ।
महाराज जी का पूरा वंश निरंतर पांडुरंग भगवान की भक्ति सेवा में समर्पित था।
शक सं.१४७५ (१५५३ई.) में सद्गुरु जनार्दन स्वामी जी की कृपा से उन्हें भगवान दत्तात्रेय के दर्शन(साक्षात्कार )एवं गुरु-अनुग्रह प्राप्त हुआ।
चतु:श्लोकी भागवत और एकादश अध्याय श्रीएकनाथी भागवत नाथजी की प्रथम ग्रंथ रचना है। इसके अलावा चिरंजीवी पर्व, भावार्थ रामायण, विविध अभंग, पद, गवळणी(प्रातः कालीन गीत), भारुड़ (प्रापंचिक व्यंग), स्तोत्र आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
संत श्री एकनाथ महाराज जी ने भगवान दत्तात्रेय प्रणीत नाथ-परंपरा-भक्ति को सम्पूर्ण भारत में फैलाया।
फाल्गुन वद्य षष्ठि (1600 ई.) में महाराज जी ने समाधि ली।