आपका प्राकट्य अंजनीग्राम के देशपांडे (कामाविसदार) परिवार में हुआ ।
आप विभिन्न दिव्यगुणों, चपलता(स्फूर्ति),असाधारण बुद्धि, मजबूत शरीर के धनी,शांत स्वभाव आदि से युक्त,भगवान हनुमान के वास्तविक अवतार थे। आपकी तपस्या भैरवनाथ शरनिरा (शाहनूर) नदी के तट पर अंजनगांव में हुई थी और हनुमंत दर्शन (साक्षात्कार ) 'वारी' (अकोट के पास) में हुआ था।
प्रारब्ध वश आपका अल्प गृहस्थाश्रम जैसे ही पूर्ण हुआ, उन्होंने हनुमान जी की तपस्या की। भगवान हनुमान ने उन्हें स्वयं और माता जानकी के साथ भगवान श्री रामचंद्र का प्रत्यक्ष दर्शन कराया।
प्रभु रामचंद्र जी ने आपकी जिह्वा पर 'श्री राम' अक्षर अंकित किये तथा उन्हें शीघ्र कवित्व का आशीर्वाद वरदान स्वरूप प्रदान किया।
तदोपरांत सद्गुरु गोविंदनाथ महाराज ने उन्हें दर्शन दिये और कुछ वर्षों बाद १७७९ ई.स. जालना में आनंदस्वामी मठ में उनका पट्टाभिषेक समारोह आयोजित किया गया।
श्रीदेवनाथ मठ, अंजनगांव सुर्जी में भी उनकी एक समाधि स्थापित है।